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घड़ियाली कर्म

प्रश्न: मैंने यह पढ़ा कि एक नेशनल पार्क में एक घड़ियाल ने एक बच्चे को पकड़ा और मार डाला। पढ़कर बहुत दुःख हुआ। यह उस बच्चे का कर्म था ऐसा बोलना शायद गलत हो जायेगा।उस बच्चे का कर्म बोलकर क्या ऐसा नहीं हो रहा कि हम गलती करने वालों को ऐसे ही छोड़ रहे हैं? उत्तर: सुनने में शायद...

कर्मफ़ल का मोह

प्रश्न: हम अपने आने वाले कोर्स के लिए मेहनत कर रहे हैं। सब लोग कोर्स से होने वाले लाभों को सुन कर बहुत खुश होते हैं लेकिन जब रजिस्टर करने का टाइम आता है तो हमें बोला जाता है कि पैसे नहीं हैं या टाइम नहीं है। ऐसे में निराश होना तो स्वाभाविक है , आशा करना स्वाभाविक है।...

क्या एक गुजरते हुए विचार से कर्म पैदा होता है?

प्रश्न: अगर हमारे मन में किसी के बारे में एक नकारात्मक सोच आ कर चली जाती है तो क्या वह मोह पैदा करती है? या फिर बार – बार द्वेष वाली सोच को बढ़ावा देने से ही मोह होता है?आगामी कर्म किस से पैदा होता है ? सिर्फ एक गुजरती हुई नकारात्मक सोच से आगामी कर्म पैदा होता है...

कर्म और कर्मफल

प्रश्न: क्या कर्म अपनी सोच सकरात्मक रखने के बारे में है या अपनी सोच और विचार निष्पक्ष रखने के बारे में हैं ? उत्तर कर्म केवल कुछ कार्य करने से ही नहीं होता है, यह बोलने से और विचारों से भी बन जाता है ,परंतु हर विचार /कर्म / बोलने से नहीं। यदि किसी विचार या बोलने के...

कर्म से भौतिक जीवन और अध्यात्मिक लक्ष्य दोनों प्रभावित होते हैं ?

प्रश्न: हम कहाँ जन्म लेंगे या हम जीवन में क्या व्यवसाय चुनेंगे, इसका चयन हम नहीं कर सकते, परन्तु हम किस से शादी करें और बच्चे हों, इसका चयन कर सकते हैं। जीवन में हम जैसे भी लोगों से मिलते हैं यह हमारे अच्छे या बुरे कर्मों का परिणाम है। यदि मुझे शिक्षा या धनोपार्जन के...

विकल्प: क्या सही है और क्या गलत ?

प्रश्न : क्या विवेक का इस्तेमाल करना एक तरह की माँग/इच्छा है? क्योंकि गलत और सही का चुनाव करना इस मन से सम्बंधित है। उत्तर : वास्तव में विवेक सही और गलत के भेदभाव/पक्षपात से गहरा है। विवेक की सहायता से अपने अंदर की चेतना को पूर्ण रूप से शुद्ध और पवित्र रखा जा सकता है।...

कर्मफल का मोह कैसे त्यागें?

प्रश्न: दमन और समर्पण में क्या अंतर है? उत्तर: दमन ज्वालामुखी की तरह है। इसमें नापसंदगी छुपी होती है जो अंदर ही अंदर आपको जलाती है और कभी भी फूट सकती है। दमन का तात्पर्य है कि अपनी किसी नापसंदगी को एक सीमा तक सहन किया जाए। लेकिन ये अस्थायी उपाय है, दमन दोगुना नुकसान...

क्या ध्यान से हमारे पिछले (संचित) बुरे कर्म मिट सकते हैं?

प्रश्न: क्या हम अपने बुरे कर्म के साथ फंस गए हैं यदि हम अतीत में कोई गलतियाँ करते है जैसे कि किसी को अज्ञानता वश वाणी से या मन से दुःख पहुँचाते हैं ? क्या हमें उनके परिणाम से गुजरना पड़ता है जो बुरे कर्म हमने किये हैं या उसे ध्यान और साधना से मिटा सकते हैं ? उत्तर :...

अभिभावक कर्म /मातृ – पितृ कर्म

प्रश्न: मैं अमेरिका में रहता हूँ। मेरे माता-पिता वृद्ध हैं और भारत में अकेले रहते हैं। मैं चाहता हूँ कि वे यहाँ आकर मेरे पास रहें। परंतु उन्हें यहाँ रहना पसंद नहीं है। वे वृद्ध हैं और काफी परेशानी में हैं। मैं अपने परिवार को छोड़ कर उनकी सेवा करने नहीं जा सकता हूँ।...

क्या कर्मों का निर्वाह (कर्मों को भोगना) ही जीवन है?

प्रश्न : यदि कर्म बंधन से छुटकारा पाना ही हमारे जीवन का लक्ष्य है तो जीने का क्या आनंद ​है? उत्तर : यदि आप जीवन को संघर्ष मानेंगे या कर्मों के चक्र से लड़ेंगे तो अवश्य ही आपका जीवन प्रश्न बन कर रह जायेगा। तब आप खुश कैसे रह सकते हैं? इसके विपरीत यदि आप आस-पास देखेंगे तो...

कर्म cornering

प्रश्न  : अभी मेरी दफ्तर की स्थिति बेहद मुश्किल हैं और मुझे ज़रुरत से ज़्यादा काम दिया गया हैं, बहुत राजनीति भी चल रही हैं. मैं नौकरी छोड़ना चाहता हूँ लेकिन अपनी वैयक्तिक कारण से नहीं छोड़ सकता हूँ. इसका प्रभाव मेरे स्वास्त्य पर हो रहा हैं और मैं नींद की दवाई ले रहा हूँ....