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क्या ध्यान से हमारे पिछले (संचित) बुरे कर्म मिट सकते हैं?

by | दिसम्बर 13, 2018 | अवर्गीकृत

प्रश्न:
क्या हम अपने बुरे कर्म के साथ फंस गए हैं यदि हम अतीत में कोई गलतियाँ करते है जैसे कि किसी को अज्ञानता वश वाणी से या मन से दुःख पहुँचाते हैं ? क्या हमें उनके परिणाम से गुजरना पड़ता है जो बुरे कर्म हमने किये हैं या उसे ध्यान और साधना से मिटा सकते हैं ?

उत्तर :

कर्म पुलिस १०० % निष्पक्ष है | आपको अतीत के हर बुरे कर्म का ऋण अदा करना पड़ेगा एवं हर अच्छे कर्मका अच्छा फल मिलेगा |

उदहारण के लिए : यह ऐसा नहीं कि एक दिन आप कोई नियम / कानून तोड़ें जैसे कि लाल बत्ती का सिग्नल तोड़ें और फिर दूसरे दिन आप आर्ट ऑफ़ लिविंग का शिविर करें ,सुदर्शन क्रिया सीखें, साधना करें और अच्छे इन्सान बन जाएँ | जब एक हप्ते के बाद वह लाल बत्ती तोड़ने का टिकट आपके घर आता है तब आपको उस दंड की भरपाई करनी पड़ती है | आप उस हप्ते भर कितना ही ध्यान क्यों ना करें वह आपको उस नियम तोड़ने के टिकट की भरपाई से नहीं बचा सकता |

फिर, गुरु और अन्य ग्रंथों का कहना है कि कर्म को मिटा दिया जा सकता है?

कर्म जो आपने अतीत में बनाया है, वह निश्चित रूप से अंकुरित होगा। उसका कर्मफल निश्चित रूप से आपके रास्ते में आएगा क्योंकि वह नियम का पालन करता है | जिस कर्म को आपने अतीत में पैदा किया है उनके कर्मफल से छुटकारा पाने का कोई रास्ता नहीं है | इसे स्पष्ट रूप से समझें !
गुरुओं का अर्थ यह है कि ध्यान करने से आप शांत व्यक्ति बन जाते है, और मन की उच्च अवस्था में आप निर्णय लेने में सक्षम होते हैं, न कि बेचैन मन से ! साधना के द्वारा खुद को बदलें आप वह अज्ञानी नहीं है | इसलिए जो कर्मफल आपके रास्ते में आता है वह कोई नये भविष्य के राग/ द्वेष पैदा नहीं करता |

नए राग/द्वेष की
उत्पति न होने से भविष्य के कर्मफल की तीव्रता कम हो जाती है पर याद रहे कि वह कर्म को समाप्त नहीं करता…….. समझ गए ? यह तुम सोचते हो …..उससे ज्यादा जटिल है ; क्योंकि यह सरल गणित नहीं है | गहन कर्मणोगति है !
उदाहरण के लिए …. यदि आपका कोई कर्मफल अंकुरित हो रहा है जो शीघ्र ही आपको कोई बड़ी लड़ाई में ले जाता है और राह चलते आदमी के साथ आपके अहम के मुद्दे की वजह से सड़क पे मार खिलाता है; लेकिन आप साधना कर रहे हैं और उसकी वजह से आप का मन शांत है, यदि वह राह चलता आदमी आप में द्वेष पैदा करता है, शायद आप अपना रास्ता बदलते हैं और घायल होने की बजाय, छोटी सी तकरार में से गुजरते हो |
तो कर्म को कैसे मिटाना है? अपने आप पर काम करके |

क्या काम करना है ?

अपने रास्ते में आते कर्म के प्रति राग और द्वेष की प्रतिक्रिया का आग्रह को न करने पर कार्य करना और इस तरह भविष्य के कर्म का सृजन होने से रोकना !

सुखी भव !

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