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क्या कर्मों का निर्वाह (कर्मों को भोगना) ही जीवन है?

by | जून 24, 2018 | अवर्गीकृत, अवर्गीकृत

प्रश्न :

यदि कर्म बंधन से छुटकारा पाना ही हमारे जीवन का लक्ष्य है तो जीने का क्या आनंद ​है?

उत्तर :

यदि आप जीवन को संघर्ष मानेंगे या कर्मों के चक्र से लड़ेंगे तो अवश्य ही आपका जीवन प्रश्न बन कर रह जायेगा। तब आप खुश कैसे रह सकते हैं? इसके विपरीत यदि आप आस-पास देखेंगे तो पाएंगे जीवन तो बस एक खेल है। याद है जब आप बचपन में लुका-छिपी खेलते थे? ठीक उसी तरह यहाँ हम अपने कर्मों से लुका-छिपी खेल रहे हैं।

जीवन को इतनी गंभीरता से न लीजिये क्योंकि कोई भी इस से जीवित बच कर नहीं निकला है। मस्त रहें, हँसते रहें और दूसरों को हँसाते रहें। हर क्षण को पूर्ण कृतज्ञता से जिएँ। याद रखें सुखद क्षण आपको शांति प्रदान करते हैं और दुःखद क्षण आपको मजबूत बनाते हैं। इसलिए अच्छे और बुरे हर पल का धन्यवाद करें।

सुखी रहो! यह एक आशीर्वाद भी है और एक आदेश भी!

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