Select Page

क्या कर्मों का निर्वाह ही जीवन है?

by | अप्रैल 21, 2019 | खेल/खेलना/आनंद, आभारी, कर्मा, प्रसन्नता/दुःख, गंभीर, खंड i

प्रश्न:

यदि कर्म बंधन से छुटकारा पाना ही हमारे जीवन का लक्ष्य है तो जीने का क्या आनंद ​है?

उत्तर :

यदि आप जीवन को संघर्ष मानेंगे या कर्मों के चक्र से लड़ेंगे तो अवश्य ही आपका जीवन प्रश्न बन कर रह जायेगा। तब आप खुश कैसे रह सकते हैं? इसके विपरीत यदि आप आस-पास देखेंगे तो पाएंगे जीवन तो बस एक खेल है। याद है जब आप बचपन में लुका-छिपी खेलते थे? ठीक उसी तरह यहाँ हम अपने कर्मों से लुका-छिपी खेल रहे हैं।

जीवन को इतनी गंभीरता से न लीजिये क्योंकि कोई भी इस से जीवित बच कर नहीं निकला है। मस्त रहें, हँसते रहें और दूसरों को हँसाते रहें। हर क्षण को पूर्ण कृतज्ञता से जिएँ। याद रखें सुखद क्षण आपको शांति प्रदान करते हैं और दुःखद क्षण आपको मजबूत बनाते हैं। इसलिए अच्छे और बुरे हर पल का धन्यवाद करें।

सुखी रहो! यह एक आशीर्वाद भी है और एक आदेश भी!

कोई आध्यात्मिक प्रश्न है? बाएं साइडबार पर “प्रश्न पूछें” बटन पर क्लिक करके एकता तक पहुंचें। एकता के ऑनलाइन ज्ञान सेशन में भाग लेने के लिए, बाईं ओर स्थित “ज्ञान संघ” बटन पर क्लिक करें।

0 Comments

Submit a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *