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क्या एक गुजरते हुए विचार से कर्म पैदा होता है?

by | दिसम्बर 13, 2018 | अवर्गीकृत

प्रश्न: अगर हमारे मन में किसी के बारे में एक नकारात्मक सोच आ कर चली जाती है तो क्या वह मोह पैदा करती है? या फिर बार – बार द्वेष वाली सोच को बढ़ावा देने से ही मोह होता है?आगामी कर्म किस से पैदा होता है ? सिर्फ एक गुजरती हुई नकारात्मक सोच से आगामी कर्म पैदा होता है या फिर बार – बार उस द्वेष को पकड़े रखने से या दोनों से?
उत्तर
हमारे मन में बहुत से विचार और भावनाएँ कई कारणवश आते-जाते रहते हैं ।
-स्थान का असर हो सकता है
-आस पास कोई अशुद्ध माहौल हो सकता है। मानो कोई व्यक्ति काम, क्रोध ,लोभ, मोह में डूबा बैठा है तो आपके मन में भी वैसे ही विचार आयेंगे |
-या फिर कोई बुरा दृश्य मन में आया और चला गया।
मानो आप सड़क से गुज़र रहे हैं और आपने कुछ बुरा देखा तो थोड़ी देर के लिए मन में एक बुरा सा भाव रहता है ।पर थोड़ी देर में आप भूल जाते हैं।इस तरह अगर कोई नकारात्मक विचार आया और चला गया तो वासना नहीं पैदा होती।जब तक कि आपने उस द्वेष वाले भाव को पकड़ कर नहीं रखा तो कर्म पैदा नहीं होगा।
राग या द्वेष को पकड़ कर रखने से मन पर उसकी छाप गहरी होती है जो वासना पैदा करती है| जब तक सोच ने छाप नहीं छोड़ी अगामी कर्म नहीं आएगा |
अगर आप बार – बार सोचोगे कि आप उस व्यक्ति से कितनी घृणा करते हो तो वासना पक्का पैदा होगी और आगामी कर्म भी बनेंगे।

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