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कर्म cornering

जून 22, 2018 | अवर्गीकृत | 0 comments

प्रश्न  :

अभी मेरी दफ्तर की स्थिति बेहद मुश्किल हैं और मुझे ज़रुरत से ज़्यादा काम दिया गया हैं, बहुत राजनीति भी चल रही हैं. मैं नौकरी छोड़ना चाहता हूँ लेकिन अपनी वैयक्तिक कारण से नहीं छोड़ सकता हूँ. इसका प्रभाव मेरे स्वास्त्य पर हो रहा हैं और मैं नींद की दवाई ले रहा हूँ. मैं इस परिस्थिति से बाहर निखलने के लिए बहुत कोशिश कर रहा हूँ. कृपया मदद कीजिये!

उत्तर   :

क्या आपने कभी ऐसा खेल खेला हैं जिसमे 3-4 खिलाडी आपको इस तरह से घेरे हुए हैं जिससे आपके पास हार माने बगैर कोई रास्ता नहीं हैं? आपको फसाया और खेल में हराया गया. ये ‘cornering’ का गेम हैं. इसी तरह, नियति हमारे सात इस खेल खेलती हैं; इसे कर्म cornering कहा जाता हैं. यदि आपने इस जीवन काल या पिछले जन्म मैं राग द्वेष से कुछ कर्म इकट्ठे किये हैं, तो वो भविष्य मैं निश्चित अवधि के बाद परिपक्व होक आपके पास वापस आएगी.

नियति आपके खाते मैं कई कर्मो के भीज को एक सात परिपक्व बना सकती हैं. इसको संभालने के लिए नियति के पास एक दिलचस्प नीती हैं. नियति ‘कर्म cornering’ नामका एक खेल खेलती हैं जहा कई कर्म अंकुरित होकर आपको घेरती हैं.

आपके मामले मैं, पहला कर्म दफ्तर मैं आपके क्षमता से अधिक ज़्यादा काम बढ़ने से अंकुरित हुआ. दूसरा बीज दफ्तर मैं राजनीती से अंकुरित हुआ, जिससे आपको नौकरी छोड़ने की इच्छा हुई. उसी समय, तीसरा बीज वैयक्तिक मजबूरी के रूप मैं अंकुरित हुआ, जिससे आप नौकरी छोड़ न सखे. इससे बुरे स्वास्थ के रूप मैं चौथे बीज अंकुर हुआ. ये ‘कर्म cornering’ एक रोचक प्रक्रिया हैं, जो आपको एक ही समय परिपक्व होने वाली अनेक बीजो को आपके पास भेजती हैं.

नियति आपके पास सिर्फ वोही लाती हैं जो आपको मिलना चाहिए, थोड़ा भी कम नहीं, थोड़ा भी ज़्यादा नहीं.

इस ‘कर्म cornering’ के खेल मैं, आप चून्हे गए हैं, लेकिन ये आपकी स्वतंत्र इच्छा पर निर्भर करता हैं की आप खेल छोड़ना चाहते हैं या नहीं?

कई कर्म के बीज एक सात अंकुरित होके जब आपको घेरे हुए हैं, और जब आपको घुटन महसूस हो रहा है, तब आप शांत और आराम रहने की कुशलता को बढ़ा सकते हैं. इस कुशलता के बिना आप इस चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल सकते हैं[घेरा हुआ कर्म].

ये कौनसी कुशलता हैं?

वो “वास्तविकता के सात जैसा हैं वैसा रहना हैं”.

बुद्ध कहते हैं, ‘वास्तविकता को जैसा हैं वैसा देखे; ऐसा नहीं जैसे आप चाहते हैं; वैसा भी नहीं जैसे आप नहीं चाहते हैं; सिर्फ जैसा हैं वैसा देखना हैं’. इसलिए ‘वास्तविकता जैसा भी हैं उसके सात रहें, उसे बदलने की कोशिश न करे’.

जब हम कठिनाईयो से गुज़र रहे होते हैं, जहा कर्म हमें घेरती हैं, तो मन किसी अन्य या दूसरे को दोषी ठहराता हैं, मनोहर कहानिया जैसी.  इससे हमारी नज़र धुंधलाती हैं और हमारी awareness की तेज़ी कम हो जाती हैं और हमको वास्तविकता को जैसा हैं वैसा देखने से रोखती हैं! इसलिए सचेत रहना आपका अपने प्रति सबसे बढ़ा ज़िम्मेदारी हैं.

सचेत रहने की इस कुशलता को बढ़ाने में क्या मदद कर सकता हैं?

  1. नियमित ध्यान
  2. आध्यात्मिक ज्ञान को नियमित रूप से पड़े या सुने

इस कुशलता को बढ़ाने के लिए पूर्व आवश्यकताएं  :

केवल श्रद्धा – अपने आद्यात्मिक प्रगति को अपनी परिवार/ नौकरी/ धन/ स्वास्त्य आदि से ज़्यादा महत्व देना.

ऐसा क्यों?

क्यूंकि केवल आद्यात्मिक गेहेराई चाक़ू की तरह आपकी awareness को तेज़ कर सकती हैं. एक तेज़ awareness के साथ, एक व्यक्ति सर्वोच्च बुद्धि प्राप्त कर सकता हैं और इससे परम सत्य को अहसास करने की संभावना भी प्राप्त होती हैं.

तो श्रध्दा से इस रास्ते पे चले! आप इसी जीवन मैं परम सत्य को प्राप्त करे! सुखी भव!!

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